PilgrimageMythologyजागेश्वर धाम: जहां स्थापित है अलौकिक ज्योतिर्लिंग

जागेश्वर धाम: जहां स्थापित है अलौकिक ज्योतिर्लिंग

जागेश्वर धाम:

भारतवर्ष में कई ऐसे मंदिर और धार्मिक स्थल है जिनसे कई रहस्य और पौराणिक मान्यताएं जुडी है। पौराणिक काल से ही ये स्थल आस्था और आध्यात्म का केंद्र हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर मंदिर इन्हीं धार्मिक स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहीं से ही भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग की पूजा का प्रचलन शुरू हुआ था।

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जागेश्वर धाम, उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले में अल्मोड़ा शहर से 36 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थान आध्यात्म और प्रकृति का एक अनूठा संगम है। प्राकृतिक सुन्दरता, शान्ति व आस्था के इस अनूठे संगम के बारे में मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग, शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।

जागेश्वर धाम 124 छोटे व बड़े मंदिरों का एक समूह है जो उंचे धने हरे-भरे देवदार के वृक्षों के बीच स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इन मंदिर समूह का निर्माण 7वीं से 14वीं शाताब्दी में कत्यूरी शासनकाल के दौरान किया गया। 14वीं से लेकर 18वीं शताब्दी के मध्य मंदिरों के रखरखाव, सौंदर्यीकरण और जीणोद्धार का काम जारी रहा।

इस धाम में 124 मंदिर है, लेकिन इनमे से केवल 4-5 मंदिरो में ही पूजा की जाती है। बाकी मंदिरों के सिर्फ दर्शन किये जाते है। इनमें से कई मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है।

कैसे पहुँचे जागेश्वर?

धने हरे-भरे देवदार के वृक्षों से घिरा जागेश्वर धाम अत्यंत रमणीक और सुंदर धार्मिक स्थल है। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शनों के लिए आते हैं। जागेश्वर धाम जाने के लिए निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर हवाई अड्डा है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम रेलवे स्टेशन है। यहां से आप टैक्सी अथवा बस के द्वारा जागेश्वर धाम पहुंच सकते हैं। रहने और ठहरने के लिए धाम के निकट कई छोटे-बड़े गेस्ट हाउस आसानी से उपलब्ध रहते हैं। यहां का मौसम सामान्यतया पूरे वर्ष यात्रा के लिए अनुकूल रहता है।

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