Thursday, August 11, 2022
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पौड़ी जिला: खासियत, पर्यटन और महत्वपूर्ण जानकारियां

हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं, हरे भरे पहाड़ और मनमोहक घाटियों से सुसज्जित पौड़ी उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल का जिला है। पौड़ी ब्रिटिश काल से ही गढ़वाल की सांस्कृतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। चारों तरफ से हरी भरी पहाड़ियों से घिरा पौड़ी उत्तराखंड का एक बेहद सुंदर जिला है।

गढ़वाल मंडल का मुख्यालय

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ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1840 में पौड़ी को अलग जिला घोषित किया गया। इसका मुख्यालय पौड़ी में बनाया गया। तत्कालीन गढ़वाल, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों को कुमाऊं डिवीजन के आयुक्त द्वारा प्रशासित किया जाता था। आजादी के पश्चात 1960 में ‘चमोली’ ज़िले को पृथक कर नया ज़िला बनाया गया। 1969 में गढ़वाल मंडल की स्थापना की गई। पौड़ी को गढ़वाल मंडल का मुख्यालय बनाया गया। सन 1997 में पौड़ी जिले से कुछ हिस्से को अलग कर रुद्रप्रयाग जिले का सृजन किया गया।

इसके उत्तर तथा उत्तरपूर्व में टिहरी गढ़वाल-रुद्रप्रयाग-चमोली है, दक्षिण में उधमसिंह नगर, पूर्व में अल्मोड़ा-नैनीताल और पश्चिम में देहरादून-हरिद्वार स्थित हैं। पौड़ी गढ़वाल जिले का मुख्यालय है। जिले में कुल 13 तहसील हैं: पौड़ी, लैंसडाउन, कोटद्वार, थलीसैण, चौबटटाखाल, श्रीनगर, सतपुली, धुमाकोट, यमकेश्वर, चाकीसैण, बीरोंखाल, जाखणीखल और रिख्निखाल।

प्रमुख पर्यटन स्थल

पौड़ी की अतुल्य सुंदरता को देखते हुए ब्रिटिश शासन काल में ही पौड़ी को अंग्रेजों ने हिल स्टेशन के रूप में विकसित कर लिया था। जिले में स्थित ऐतिहासिक इमारत, पर्यटन और धार्मिक स्थल हमेशा से ही पर्यटकों अपनी ओर आकर्षित करते हैं। लाखों की संख्या में लोग पौड़ी जिले के अलग-अलग हिस्सों में प्रकृति के विभिन्न रंगों को निहारने के लिए आते हैं।

खिर्सू, कंडोलिया मंदिर, चौखम्बा व्यू पॉइंट, तारा कुंड, दुधाटोली, चिल्ला वन्य जीव अभ्यारण्य, ढिकाला आदि यहां के प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। पौड़ी जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल: तारकेश्वर महादेव मंदिर, श्री कोटेश्वर महादेव मंदिर, धारी देवी मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर, बिनसर महादेव मंदिर, माँ ज्वाल्पा देवी मंदिर, नागदेव मंदिर, क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर, कंडोलिया मंदिर।

बिनसर महादेव (Binsar mahadev)

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बिनसर महादेव मंदिर यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह पौढी शहर से 114 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जगह मनमोहक प्राकृतिक सौन्‍दर्यता के लिए जानी जाती है। इस मंदिर को बिंदेश्‍वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तट से 2480 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर थली सेण से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हर साल ‘वैकुण्ठ चतुर्दशी’ और ‘कार्तिक पूर्णिमा’ पर मेले का आयोजन किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों से लोग यहां भगवान शिव की पूजा करने आते हैं। 

तारकेश्वर महादेव मंदिर

तारकेश्वर महादेव मंदिर ‘गढ़वाल राइफल’ के मुख्यालय लैंसडाउन लगभग 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है । देवदार और चीड़ के घने जंगलों से घिरे इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। यहां वर्ष भर श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए आते हैं। श्री कोटेश्वर महादे

माँ धारी देवी मंदिर

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माँ काली को समर्पित धारी देवी मंदिर श्रीनगर से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि यहां स्थापित माँ धारी देवी की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। यह मूर्ति पहले एक कन्या फिर महिला और अंत में बूढ़ी महिला का रूप धारण करती है। दूर दूर से श्रद्धालु माँ काली के दर्शनों के लिए यहां आते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मूर्ति से आयी आवाज़

कहा जाता है एक बार इस क्षेत्र में आए भीषण बाढ़ मंदिर बह गया था। मंदिर में मौजूद माता की मूर्ति भी बह रही थी। लेकिन मूर्ति धारो गांव के पास एक चट्टान से टकराकर रुक गई। इसके बाद गांव वालों को मूर्ति से आवाज सुनाई देने लगी। माँ धारी ने गाँव के लोगों से उस मूर्ति स्थापित करने को कहा। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर वहां पर मूर्ति स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया।

माता धारी देवी मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है 2013 में माता की मूर्ति को उनके मूल स्थान से हटा दिया गया था। प्रतिमा को 16 जून 2013 की शाम को हटाया गया था और उसके कुछ ही घंटों बाद राज्य में आपदा आई थी। साल 2013 में उत्तराखंड में आई इस भयानक आपदा में हजारों लोग मारे गए थे। बाद में उसी जगह पर फिर से मंदिर का निर्माण कराया गया।

खिर्सू (Khirshu)

खिर्सू से खूबसूरत और मनोरम हिमालयी पर्वत श्रंखलाओं के दृश्य बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यहां से खूबसूरत हिमालयी पर्वत श्रंखलाओं के नजारे सभी का मन मोह लेते हैं। यहाँ का शांत और खूबसूरत वातावरण भारी संख्‍या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह जगह ओक, देवदार और सेब के बगीचों से घिरी हुई है। खिर्सू पौड़ी से 19 किलोमीटर दूर 1,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 

दुधाटोली (Doodhatoli)

हरे भरे घने जंगलों से घिरा दूधातोली 3100 मी० की ऊँचाई पर स्थित है। यहाँ से हिमालय पर्वतमाला और आस-पास के क्षेत्रों का मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है। गढ़वाल के अदम्य स्वतंत्रता सेनानी, वीरचंद्र सिंह गढ़वाली इस जगह से बहुत मोहित थे। उनकी अंतिम इच्छा के रूप में, उनके नाम पर मृत्युपरांत यहां एक स्मारक बनाया गया। 

जिले का निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है। नजदीकी रेलवे स्टेशन कोटद्वार रेलवे स्टेशन है।

जनसांख्यिकी एवं अन्य जानकारी

जिला : पौड़ी गढ़वालक्षेत्रफल : 5,230 Sq. Km
मुख्यालय : पौड़ीजनसंख्या : 687,271
तहसील : 13पुरुष : 326,829
विकास खंड: 15महिला : 360,442
पुलिस स्टेशन : 11जनसंख्या घनत्व : 129
विधानसभा क्षेत्र : 06वेबसाइट : https://pauri.nic.in/

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