Informationबुरांश का जूस: औषधीय गुण, उपयोग और लाभ

बुरांश का जूस: औषधीय गुण, उपयोग और लाभ

औषधीय वनस्पति बुरांश 

देवभूमि उत्तराखंड असंख्य वनस्पतियों का भंडार है। ये वनस्पतियां अनेकों प्रकार की जड़ी बूटियों और औषधियों का भंडार हैं। अगर इन औषधियों की सही पहचान और उपयोग किया जाए तो हम बड़ी से बड़ी बिमारी से निजात पा सकते हैं। इन्ही औषधीय वनस्पतियों में से एक है बुरांश (Rhododendron Arboreum)।

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हमारे दैनिक जीवन में बुरांश का उपयोग कई प्रकार से किया जाता है। बुरांश का जूस (Rhododendron squash) स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। इसका सेवन करने से कई तरह के स्वास्थ्य लाभ होते हैं। इसके सेवन से कई तरह की बीमारियों से घर पर ही निजात पाई जा सकती है। बुरांश के औषधीय गुणों और उपयोग को जानने से पहले, जानते है बुरांश की खासियत…

बुरांश का परिचय (Rhododendron Arboreum)

बुरांश एक झाड़ीदार अथवा मध्यम ऊँचाई वाला वृक्ष है, जो एरिकेसिई कुल (Ericaceae) की वनस्पति है। बुरांश का वानस्पतिक नाम रोडोडेन्ड्रोन अरबोरियम (Rhododendron arboreum) है। यह मध्य हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला सदाबहार वृक्ष है। इसका फूल बेहद मनमोहक और औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है। 

औषधीय गुणों से परिपूर्ण होने के कारण बुरांश (Buransh flower) के फूल का उपयोग प्राचीन काल से ही औषधि (Ayurvedic medicine) के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है।

उत्तरांखड का राज्य वृक्ष

बुरांश उत्तराखंड का राज्य वृक्ष (State Tree of Uttarakhand) तथा हिमाचल प्रदेश का राज्य पुष्प (State flower of Himanchal) है। परंतु ये दोनो ही प्रजातियां अलग है। उत्तराखंड का राज्य वृक्ष लाल बुरांश (Rhododendron arboreum) है, जबकि Pink Rhododendron (Rhododendron campanulatum) हिमाचल का राज्य पुष्प है। बुरांश नेपाल का राष्ट्रीय फूल भी है।

भारत में 85 से अधिक प्रजातियां

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भारत में बुरांश की लगभग 85 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा बुरांश नेपाल, चीन, जापान, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस आदि देशों में भी पाया जाता है। बुरांश के फूलों के खिलने का समय मार्च-अप्रैल माह में होता है। हालांकि कई स्थानों पर फरवरी महीने के अंतिम में भी बुरांश के पुष्पों को देखा जा सकता है। 

बुरांश के अन्य नाम

  • अंग्रेजी (English) – रोज ट्री (Rose – tree), ट्री रोडोडेन्ड्रोन (Tree rhododendron)
  • संस्कृत (Sanskrit) – वरांश, हिम वरांश
  • नेपाल – गुरांश (Guras), लाली गुरांश (Lali gurans)
  • मेघालय (Meghalaya)- तिन–शॉ (Tin- saw)
  • तमिल (Tamil) – एलिंगी वेल्लामरम (Alingi vellimaram)
  • कन्नड़ (Kannada) -बिली (Billi)
  • बंगाली (Bengali) – बरास (Baras)। 

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड

अब तक बुरांश का सबसे ऊंचा पेड़ नागालैंड में पाया गया है। जिसकी ऊंचाई 108 मीटर थी और यह गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness Book Of World Records) में दर्ज है। नागालैंड द्वारा 1993 में इसे ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराया गया।

बुरांश: औषधीय उपयोग

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औषधीय वनस्पति बुरांश की मुख्यतः 2 प्रजातियां लाल बुरांश ( Rhododendron arboreum Sm) तथा मदगन्धा बुरांश (Rhododendron campanulatum D. Don) का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है

लाल बुरांश (Rhododendron arboreum Sm.)

लाल बुरांश का यह वृक्ष लगभग 10 मीटर (buransh tree) ऊंचा होता है। यह हमेशा हरा रहता है। इसके पत्ते शाखाओं के छोर पर गुच्छों में होते हैं। पत्ते 5 से 15 सेमी तक लम्बे, चमकीले हरे रंग के होते हैं। इसके फूल (Buransh flower) लाल मखमली रंग के होते हैं।

मदगन्धा बुरांश (Rhododendron campanulatum D. Don)

मदगन्धा बुरांश हिमालय और कश्मीर के उच्च पर्वतीय शिखरों में पाया जाता है। यह पौधा (Buransh tree) लगभग 1- 4.5 मीटर ऊंचा और झाड़ीदार वृक्ष होता है। इसके पत्ते चमकीले और चिकने होते हैं। इसके फूल गुलाबी और सफेद रंग के होते हैं।

बुरांश के औषधीय लाभ- (Buransh Juice Benefits)

विटामिन और मिनरल्स का भंडार

विटामिन और मिनरल्स की प्रचुर मात्रा के कारण बुरांश से अनेकों स्वास्थ्य लाभ होते हैं । इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और विटामिन-सी सहित कई अन्य विटामिन और मिनरल्स मौजूद होते हैं। ये विटामिन और मिनरल्स हमारे शरीर में कई तरह की पोषक तत्वों की कमी को पूरा करते हैं।

बुरांश में पाई जाने वाली एंटी-डायबिटिक, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटी माइक्रोबियल, हार्ट एंड लिवर प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज हमारे शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाती हैं। बुरांश के फूलों से बना शरबत (Rhododendron squash) कई तरह की बीमारियों को ठीक करने में मददगार होता है। बुरांश का जूस हृदय रोगियों के लिए बेहद लाभकारी और उपयोगी माना जाता है। यह हाई-ब्लड प्रेशर में भी लाभकारी होता है।

हृदयरोग में लाभदायक (Heart Disease)

हृदय रोगों में बुरांश के फूल के रस (Buransh Squash) का सेवन काफी लाभदायक माना जाता है। हृदय संबंधी बीमारी ग्रस्त लोगों को बुरांश के जूस के सेवन से काफी आराम मिलता है। यह हृदय संबंधी सभी विकारों को दूर करता है।

बुरांश के जूस (Buransh Juice) में ‘पोली फैटी एसिड’ अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है। इसी के चलते यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनने देता है। जिससे हृदय संबंधी बीमारियां का खतरा काफी हो जाता है। 

किडनी और लीवर (Kidney and Lever)

किडनी और लीवर जैसी समस्याओं मैं भी बुरांश के फूल का रस अत्यंत ही लाभकारी माना जाता है। लेकिन किडनी और लीवर की बीमारियों से ग्रसित लोगों को डॉक्टर से परामर्श के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए।

हड्डियों का दर्द (Joint Pain)

बुरांश के फूल का जूस हड्डियों के दर्द से परेशान लोगों के लिए भी अत्यंत गुणकारी माना जाता है। बुरांश के फूल में कैल्शियम और अन्य मिनरल्स पाए जाते हैं जो कि बढ़ती उम्र में हड्डियों के दर्द से परेशान लोगों को हड्डियों के दर्द से निजात दिलाता है।

खून की कमी दूर करता है (Beneficial In Anemia)

बुरांश (Buransh Squash) का निरंतर सेवन रक्त कोशिकाओं के बढ़ने में मदद करता है। इसमें फूल में ‘विटामिन ए’ के अलावा विटामिन बी-1, बी-2 और आयरन होता है जो कि इंसान के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता है। इससे एनीमिया’ यानी खून की कमी को दूर होती है।

मधुमेह के इलाज में (Beneficial In Diabetes)

मधुमेह के इलाज के लिए भी बुरांश का जूस लाभकारी माना जाता है। इसकी एंटी ‘डायबिटिक प्रॉपर्टीज’ शरीर में शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है। डायबिटीज से ग्रसित लोगों बुरांश के जूस का सेवन से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य करना चाहिये।

सिर दर्द में बुरांश के फायदे (Benefits in Relief from Headache)

कई लोगों को प्रायः सिर दर्द की शिकायत रहती है। बुरांश के पत्तों को पीसकर सिर पर लगाने से सिर दर्द से राहत मिलती है। बुरांश के पत्ते का चूर्ण बनाकर नाक के रास्ते से लेने पर भी सिर दर्द से राहत मिलती है। 

पोषक तत्वों की पूर्ति (Nutrient supply)

बुरांश में फाइबर, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन और विटामिन-सी सहित कई अन्य विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसलिये बुरांश के रस का नित्य सेवन करने से शरीर में आयरन सहित कई अन्य पोषक तत्वों की पूर्ति होती है। बुरांश में पाई जाने वाली एंटी-डायबिटिक, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीमाइक्रोबियल, हार्ट एंड लिवर प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज हमारे शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं।

जोड़ों के दर्द का इलाज (Buransh Benefits to Treat Arthritis)

जोड़ों के दर्द या गठिया रोग में बुरांस के पत्तों को पीसकर जोड़ों पर लगाने से जोड़ों के दर्द और सूजन में लाभ होता है।

साइड इफेक्ट (side effects of Rhododendron squash)

बुरांश के कई औषधीय लाभ हैं बशर्ते इसका सही से उपयोग हो। बुरांश के पुष्प से उत्पादित औषधि आयुर्वेदिक है, सामान्यतः इसके बहुत ही कम साइड इफेक्ट देखने को मिलते हैं। लेकिन बुरांश में कई तरह के फाइटोकेमिकल्स मौजूद होते हैं। इसलिए अत्यधिक मात्रा में बुरांश के जूस का सेवन करने से बचना चाहिए। चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इसका औषधीय उपयोग करना चाहिये।

अन्य उपयोग

स्थानीय रोजगार को बढ़ावा (Generating Local Employment)

औषधीय लाभ के साथ-साथ बुरांश स्थानीय युवाओं के लिए एक रोजगार का भी साधन है। स्थानीय लोग बुरांश का रस निकालकर इसका जूस बनाकर बिक्री करते हैं। साथ ही साथ बुरांश के फूलों के रस से बनी चटनी शरबत आदि की मांग भी बाजार में लगातार बढ़ रही है।

इन सभी के अलावा बुरांश के वृक्ष की लकड़ियों का फर्नीचर आदि बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसकी पत्तियां जैविक खाद आदि बनाने में सहायक होती है। हालांकि फर्नीचर आदि के व्यवसाय में बुरांश के पेड़ों के कटान की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए बुरांश के फूल का उपयोग ही ज्यादा फायदेमंद है।

प्रकृति का वरदान बुरांश

बुरांश मनुष्य को प्रकृति द्वारा दिया गया एक वरदान है। विगत कई वर्षों से बुरांश के उपयोग हेतु प्रचार और प्रसार के तमाम प्रयास किए जाते रहे हैं। स्थानीय लोग इसका उपयोग कर स्वरोजगार को बढ़ावा भी दे रहे हैं। लेकिन फिर भी इसका प्रचार और प्रसार व्यापक रूप से नहीं हो सका है।

सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार तो ग्राहक उत्पादों को चाहते हुए भी नहीं खरीद पाते हैं क्योंकि उन्हें यह नहीं पता होता है कि ये उत्पाद कहां से प्राप्त करें।

अगर ग्राहकों और उत्पादकों की बीच बीच की इस दूरी को कम किया जा सके तो इससे केवल बुरांश ही नहीं बल्कि अन्य व्यवसाय से जुड़े लोगों भी ग्राहकों तक अपने उत्पाद पहुंचाने में आसानी हो सकेगी। इससे स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

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