Monday, October 3, 2022
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रुद्रप्रयाग ज़िला: परिचय और महत्वपूर्ण जानकरियाँ

रुद्रप्रयाग जिला उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में स्थित है। अलकनंदा और मंदाकिनी के संगम के लिए प्रसिद्ध रुद्रप्रयाग पंच प्रयागों में से एक है। यहीं से ही अलकनंदा नदी आगे बढ़ते हुए देवप्रयाग में जाकर भागीरथी से मिलती हुई गंगा की ओर बढ़ती है। रुद्रप्रयाग ज़िला यहां पर स्थित धार्मिक स्थलों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम भी रुद्रप्रयाग जिले में ही स्थित है।

ज़िले का सृजन

रुद्रप्रयाग ज़िले का सृजन 16 सितंबर 1997 को किया गया। पौड़ी, टिहरी, और चमोली जिले से कुछ क्षेत्रों को मिलकर रुद्रप्रयाग जिले का सृजन किया गया…

  • पौड़ी ज़िले से खिर्सु ब्लॉक का हिस्सा
  • चमोली ज़िले से अगस्तमुनी और उखीमठ ब्लॉक तथा पोखरी और कर्णप्रयाग ब्लॉक के कुछ हिस्से
  • टिहरी ज़िले के जखोली और कीर्तिनगर ब्लॉक के कुछ हिस्से को मिलाकर रुद्रप्रयाग जिले का सृजन किया गया।

जिले का प्रशासनिक मुख्यालय रुद्रप्रयाग क़स्बे में स्थित है। रुद्रप्रयाग जिला बेहद ही खूबशूरत और उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण जिला है। इसके उत्तर में उत्तरकाशी, पूर्व में चमोली, दक्षिण में पौड़ी गढ़वाल और पश्चिमी टिहरी गढ़वाल स्थित है।

पर्यटन और तीर्थस्थल

रुद्रप्रयाग ज़िले में पर्यटन की अपार सम्भावनाएँ है। धार्मिक पर्यटन, साहसिक पर्यटन हो या प्रकृति के खूबसूरत नज़ारों को देखने के शौक़ीन, सभी के लिए यह एक उपयुक्त स्थान है। प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में लोग रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम में भगवान केदारनाथ के दर्शन करने आते हैं।

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रुद्रनाथ मंदिर, कोटेश्वर मंदिर, तुंगनाथ, गुप्तकाशी, उखीमठ, त्रिजुगीनारायण मंदिर, चोपता भी रुद्रप्रयाग जिले के प्रमुख आकर्षण हैं।

केदारनाथ मंदिर

केदारनाथ मन्दिर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यता है कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों द्वारा कराया गया था। पांडवों ने भगवान शिव की तपस्या कर यहां पर महादेव के दर्शन प्राप्त किए थे। केदारनाथ उत्तराखंड में स्थित चारधामों में से एक धाम भी है।

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हर वर्ष यहां पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की उपासना और दर्शनों के लिए यहां आते हैं। केदारनाथ धाम के कपाट प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह के अंत में अक्षय तृतीया को खुलते हैं। नवम्बर महीने में कार्तिक पूर्णिमा के दिन केदारनाथ के कपाट पूजा अर्चना और विधि विधान के बंद होते है। इस दौरान भगवान केदारनाथ की पूजा अर्चना ऊखीमठ में की जाती है।

ऊखीमठ

ऊखीमठ भगवान केदारनाथ का शीतकालीन निवास स्थान है। शीतकाल के दौरान केदारनाथ मंदिर और मध्यमहेश्वर से मूर्तियों को उखीमठ लाया जाता है और छह महीने तक यहाँ पूजा की जाती है। यहां पर उषा और अनिरुद्ध भगवान का मंदिर स्थापित हैं। उषा के नाम से ही इस स्थान का नाम उषमठ पड़ा, जिसे अब ऊखीमठ के नाम से जाना जाने लगा। ऊखीमठ रुद्रप्रयाग से 41 किमी और गुप्तकाशी से 13 किलोमीटर की दूरी पर है।

रुद्रप्रयाग

जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है कि इस स्थान का नाम भगवान शिव के नाम से रुद्रप्रयाग पड़ा। रुद्रप्रयाग मंदिर अलकनंदा और मंदाकिनी नदी के पवित्र संगम पर स्थित है। मान्यता है कि इस स्थान पर नारद मुनि ने भगवान शिव की तपस्या की। नारद मुनि की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने अपने रुद्र-अवतार में प्रकट होकर नारद को दर्शन दिए। भगवान शिव के रुद्र अवतार के कारण ही इस स्थान का नाम रुद्रप्रयाग पड़ा। रुद्रप्रयाग ज़िले का मुख्यालय भी रुद्रप्रयाग नगर में स्थित है।

त्रियुगिनारायण

त्रियुगिनारायण मंदिर रुद्रप्रयाग ज़िले के स्थित भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है, जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ की स्थापना द्वापरयुग में हुई। इस स्थान पर विष्णु भगवान ने वामन देवता का अवतार लिया था। यहां विष्णु भगवान वामन देवता के रूप में पूजे जाते हैं।

मान्यताओं के अनुसार यहां पर भगवान शिव जी और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में अग्निकुण्ड स्थित है जिसे अखंड धूनी जलती है। इस मंदिर का निर्माण केदारनाथ शैली में किया गया है। यह मंदिर देखने में केदारनाथ मंदिर की भांति लगता है। त्रियुगिनारायण में तीन पवित्र कुंड भी विद्यमान हैं जो रुद्र कुंड, विष्णु कुंड एवं ब्रह्म कुंड कहलाते हैं।

तुंगनाथ

तुंगनाथ मंदिर, सबसे अधिक ऊँचाई में स्थित पंचकेदार है। यह मंदिर चोपता से लगभग 3.5 किमी दूर चंद्रनाथ पर्वत पर 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। तुंगनाथ में भगवान शिव की पंच केदारों में से एक के रूप में पूजा की जाती है। यहां पहुंचने के लिए सबसे पहले चोपता पहुंचना होता है। चोपता से तुंगनाथ की दूरी पैदल चलकर तय करनी होती है

चोपता

चोपता गोपेश्वर से लगभग 40 किमी की दूरी पर ऊखीमठ-गोपेश्वर रोड पर स्थित एक बेहद ही सुंदर पर्यटक स्थल है। समुद्र तल से बारह फुट की ऊंचाई पर बसा यह पर्यटन स्थल गढ़वाल हिमालय के सबसे सुंदर स्थानों में से एक है। यहाँ से हिमालय पर्वत के शानदार नज़ारों को देखने पर्यटक यह खिंचे चले आते हैं। यहाँ से पंचकेदारो में एक तुंगनाथ मंदिर के दर्शनो के लिए पैदल यात्रा आरम्भ होती है।

जनसांख्यिकी एवं अन्य जानकारी

जिला : रुद्रप्रयाग क्षेत्रफल : 1,984 Sq Km
मुख्यालय : रुद्रप्रयाग जनसंख्या : 242285
तहसील : 4पुरुष : 114,589
विकास खंड: 3महिला : 127,696
पुलिस स्टेशन : 5जनसंख्या घनत्व : 122
विधानसभा क्षेत्र : 2वेबसाइट : https://rudraprayag.gov.in/
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