Informationउत्तराखंड की भौगोलिक संरचना और इसकी विशेषता

उत्तराखंड की भौगोलिक संरचना और इसकी विशेषता

परिचय

9 नवम्बर 2000 को उत्तर प्रदेश से पृथक कर एक नए राज्य उत्तराखंड (Uttarakhand)का सृजन हुआ। उत्तराखंड को 11वें हिमालयी राज्य के और देश के 27 वें राज्य के रूप में मान्यता मिली। उत्तराखंड राज्य के उत्तर-प्रदेश से अलग होने का एक प्रमुख कारण था यह की भौगोलिक स्थिति। उत्तराखंड का अधिकतर हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहाँ का विकास मैदानी क्षेत्रों की तुलना में कम हुआ। इसी अंतर देखते हुए अलग उत्तराखंड राज्य की मांग स्थानीय लोगों द्वारा उठाई जाने लगी।

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पृथक उत्तराखंड राज्य को लेकर वर्षों की माँग और आंदोलनों को देखते हुए 9 नवम्बर 2000 को पृथक उत्तराखंड राज्य को मान्यता दे गई। उतर प्रदेश से कुछ मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों को मिला इस राज्य का निर्माण किया गया। आइए जानते के क्या है उतराखंड राज्य की भौगोलिक संरचना और इसकी खाशियत…

भौगोलिक संरचना

अक्षांशीय विस्तार

उत्तराखण्ड राज्य का अक्षांशीय विस्तार 2º44′(28º 43′ उत्तर से 31º 27’ उत्तरी अंक्षाश) एवं देशांतरीय विस्तार 32º8′ (77º34’ पूर्व से 81º02’’ पूर्वी देशान्तर) के मध्य है। राज्य का क्षेत्रफल 53484 वर्ग किमी. है जो देश के कुल क्षेत्रफल का 1.63% है। राज्य की अधिकतम लम्बाई 358 किमी. एवं अधिकतम चौड़ाई 320 किमी. है। राज्य का आकार लगभग आयताकार है। क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तराखंड राज्य का देश में 18वाँ स्थान है। चमोली ज़िला क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा ज़िला है जबकि चंपावत सबसे छोटा ज़िला है।

86.07% भाग पर्वतीय

उत्तराखंड राज्य के कुल क्षेत्र फल में पर्वतीय भाग 46,035 वर्ग किमी. यानी यह राज्य के कुल क्षेत्रफल का 86.07% है। राज्य का मैदानी भाग 7,448 वर्ग किमी. है जो कुल क्षेत्रफल का 13.93% है। राज्य का उत्तर से दक्षिण में विस्तार 320 किमी. है जबकि पूर्व से पश्चिम में विस्तार 328 किमी. है। उत्तराखंड प्राकृतिक सम्पदा से सम्पन्न प्रदेश है। राज्य का लगभग 66 प्रतिशत क्षेत्र वनों से घिरा हुआ है जो कि राष्ट्रीय वननीति के न्यूनतम वनक्षेत्र (33% ) से लगभग दो गुना है। प्रदेश के कुल क्षेत्रफल के 34,662 वर्ग किमी पर वनक्षेत्र का विस्तार है।

भौगोलिक विस्तार

राज्य का भौगोलिक विस्तार पर्वतीय से लेकर मैदानी भाग तक है। जिसका विभाजन अध्ययन की सुविधा दृष्टि से चार भागों में किया जा सकता है-
1- महान हिमालयी क्षेत्र – 4800 से 6000 मीटर
2- शिवालिक हिमालयी क्षेत्र – 3000 से 4000 मीटर
3- मध्य हिमालयी क्षेत्र – 750 से 1200 मीटर
4- गंगा का मैदानी क्षेत्र

राज्य की सीमाएँ

अंतर्राष्ट्रीय सीमा

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राज्य की सीमाएँ अंतर्राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल की सीमाएँ लगती है। नेपाल की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से पिथौरागढ़, चंपावत व ऊधम सिंह नगर ज़िलों की सीमाएँ मिलती है। चीन की सीमाएँ उत्तरकाशी, चमोली, व पिथौरागढ़ से मिलती हैं। पिथौरागढ़ सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं वाला ज़िला है। यह नेपाल व चीन (तिब्बत) की सीमाओं को स्पर्श करता है।

अंतर्राज्यीय सीमा

अंतर्राज्यीय सीमा की बात करें तो, पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण (दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण तथा दक्षिण-पूर्व ) में उत्तर प्रदेश से राज्य की सीमाएँ मिलती है। उत्तर-प्रदेश से ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी, हरिद्वार, व देहरादून सहित 5 ज़िलों की सीमाएँ मिलती हैं। हिमाचल प्रदेश से 2 ज़िले उत्तरकाशी व देहरादून की सीमाए लगती हैं। पिथौरागढ़ राज्य का सबसे पूर्व ज़िला भी है जबकि देहरादून सबसे पश्चिमी ज़िला है। राज्य का सबसे उत्तरी ज़िला -उत्तरकाशी तथा सबसे दक्षिणी ज़िला ऊधम सिंह नगर है।

जलवायु

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उत्तराखंड राज्य का अधिकतर हिस्सा पर्वतीय है। विषम भौगोलिक संरचना के कारण राज्य का पर्वतीय यानी हिमलायी क्षेत्र भूकम्प एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अति संवेदनशील है। भिन्न-भिन्न भूसंरचना के कारण ही राज्य की जलवायु में काफी विविधता पाई जाती है। उत्तराखंड राज्य शीत जलवायु प्रदेश की श्रेणी में आता है लेकिन यहाँ मौसम में हमेशा बदलाव होता रहता है।

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